गया शहर में अतिक्रमण हटाने का कहर फ़िर शुरु

20 Sep 2010

·         गयाबोधगया के बडे होट्ल एवं प्रतिष्ठानों को कोई छुता भी नही
·        गरीब है इसके शिकार
मगध आयुक्त श्री के०पी० रमैया के आने के साथ हीं अतिक्रमण हटाने के नाम पर फ़ुट्पाथी दुकानदारो पर नगर निगम ने   कहर बरपाना शुरु कर दिया है।  अतिक्रमण हटाना अच्छी बात है बशर्ते कनून की सीमा के अंदर एवं साफ़ नियत से यह किया जाय।  अतिक्रमण हटाओ अभियान का सत्य कुछ और है। भ्रष्टाचार के दलदल में गले तक डुबे गया नगर निगम सारे नियम कानून ताक पर रखकर यह काम कर रहा है। अतिक्रमण के नाम पर २० हजार  रुपए जुर्माना नगर पालिका अधिनियम के विरूद्ध है। निगम को मात्र १००० रु० जु्र्माना का अधिकार है। ईस संवाददाता ने  पूर्व निगम आयुक्त और इस अभियान एवं   fir`i{k  मेला प्रभारी राय मदन किशोर से  उनके फ़ोन न० ९४३१४१६२२८ पर बातचीत कि तो उन्होंने बताया कि नगर निगम बोर्ड को जुर्माने की राशि बढाने का  अधिकार है। यह पुछने पर की एक फ़्रीज जो अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान जब्त कि गई उसकी रसीद फ़्रिज मालिक को दी गई  है या नही उन्होने बताया कि फ़्रिज का कोई दावेदार सामने नही आया है इसलिए उस फ़्रिज को नगर आयुक्त के चेम्बर में रख दिया गया है। यह अभियान वस्तुत: श्री रमैया के द्वारा चलाया जा रहा है और किसी अधिनस्थ अधिकारी कि हिम्मत नही है उनके गलत आदेश को भी मानने से ईंकार करने कि संवाददाता  ने   गया के जिलाधिकारी से उनके फ़ोन न० ९७७१०४८७८७ इस अतिक्रमण अभियान तथा २० हजार रुपए जुर्माने के संबंध मे बात कि तो उन्होने  vufHkKark  प्रकट कि और कहा कि इसकी उन्हे कोई   सुचना नही है तथा यह भी कहा कि वे पता लगाते हैं कि वा्स्तविकता क्या है।   पूर्व में श्री रमैया ने गया के सदियों पुराने भुसुंडा मेले की जमीन से संबंधित एक विवादित मामले जिसमे उक्त सरकारी जमीन का  डिमांड    एक व्यक्ति ने अपने पक्ष में कट्वा लिया था तथा गया के जिलाधिकारी श्री संजय सिंह द्वारा भी गलती से आदेश परित हो गया था जिसमें तुरंत सुधार करते हुए जिलाधिकारी संजय सिंह  ने  डीमांड रद्द करने का आदेश दिया था , उनके उक्त आदेश को आयुक्त रमैया के न्यायालय में चुनौती दी गई थी श्री रमैया ने जिलाधिकारी के आदेश को खारिज करते हुए व्यक्ति विशेष के पक्ष में भुसुंडा मेले कि जमीन का डीमांड काटने का आदेश किया था  परन्तु जिलाधिकारी संजय सिंह ने आयुक्त के आदेश को  पुन: उनके  पास पुर्नविचार हेतु भेजा था तबतक रमैया का तबादला हो गया था और उनकी       जगह पर आए नए आयुक्त राणा अवधेश   ने श्री रमैया के आदेश को पलटते हुए सदियों पुरानी भुसुंडा मेला जमीन कि रक्षा कि। उक्त जमीन तकरीबन ६० एकड है और उसका बाजार मूल्य पांच लाख रुपए प्रति कठा है।   गया एवं बोधगया में बहुत सारे होट्ल एवं व्यवसायिक संस्थानों ने सरकारी जमीन यहां तक की फ़ाल्गु नदी का भी अतिक्रमण किया है परन्तु आश्चर्य है की अतिक्रमण कि गाज सिर्फ़ गरीबों पर गिरती है। बडे होटलों और व्यवसायिक संगठनो के द्वारा किए गए अतिक्रमण के  खिलाफ़ कोई कदम नही उठाना , अधिकारियों की निष्पक्षता एवं अस्मिता पर सवाल खडा करता है।
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