सुदर्शन और सोनिया , सी आई ए और रुस

13 Nov 2010

सोनिया गांधी

के सुदर्शन


बिल क्लिंगटन के साथ सोनिया गांधी
मेनका गांधी
सुदर्शन ने यह कहकर की सोनिया सी आई ए की एजेंट है और अवैध सतान हैं एक अच्छा - खासा विवाद खडा कर दिया । कांग्रेस पार्टी सारे देश में तोड - फ़ोड मचाने में जुट गई । के सुदर्शन को भी साक्ष्यो के साथ कोई बात कहनी चाहिये थी । वैसे एक बहुत पुराना विवाद है रुस द्वारा अपने हितो की रक्षा के लिये राजीव गांधी परिवार को पैसे देने की ( http://en.wikipedia.org/wiki/Sonia_Gandhi ) यह लिंक है जहां सारी बातें दर्ज है। क्वात्रोची इटली का था और राजीव गांधी का परिवारिक मित्र था , यह एक तथ्य है । बोफ़ोर्स खरीद में पैसों का लेन - देन हुआ , इससे ईंकार नही किया जा सकता । वैसे भी खरीद के सभी सौदों में लेन देन होता है और सभी दल ईसे जानते हैं। बोफ़ोर्स घोटाले के कारण राजीव गांधी को सता से हाथ धोना पडा । सोनिया गांधी के माध्यम से क्वात्रोची का प्रवेश प्रधान मंत्री निवास में हुआ था । सोनिया गांधी का फ़र्ज था कि पति के सम्मान की रक्षा के लिये क्वात्रोची को सामने आने के लिए कहती । आजतक बोफ़ोर्स घोटाला रहस्य बना हुआ है । ऐसी परिस्थिति में यह प्रश्न स्वाभाविक है की अगर बोफ़ोर्स खरीद में घोटाला हुआ है तो फ़िर सी आई ए से पैसा लेने का या एजेंट होने का आरोप सुदर्शन लगा रहे है तो कोई आश्चर्य नही । जब एक बार किसी के उपर चोर होने का आरोप लग जाता है तो जबतक वह व्यक्ति आरोप मुक्त नही हो जाता , बार-बार आरोप उसके उपर लगता है। नेट पर मुख्यत: युवा हीं आते है , उन्हें बहुत सारी बातों की जानकारी नही है। सिक्किम के भारत में विलय के लिये 1975 में भारत ने क्या - क्या किया यह राजनितिक विश्लेषक जानते हैं । चोग्याल सिक्किम के राजा थें और उनकी अमेरिकन पत्नी होप कुक भारत मे विलय के खिलाफ़ थें। विलय के लिये वह सारे हथकंठे अपनाये गये जिन्हें लिखना मुम्किन नही है। चोग्याल शराब के शोकिन थे और रसिया मिजाज के थें। उनकी इस कमजोरी का फ़ायदा उठाकर भारत में विलय के दस्तावेज पर दस्तखत कराया गया। सोवियत संघ का किस्सा तो सबको मालुम होगा । पेत्रोइस्त्का जब वहां लागु हुआ , मैने कहा था अब सोवियत संघ टुकडो में बट जायेगा , वही हुआ , गोर्बाचोव की भुमिका संदिग्ध थी , सोवियत संघ के टुकडे - टुकडे हो कर बिखरने का दाग आज भी गोर्बाचोव के माथे पे है । आज वह आराम से अमेरिका में प्रोफ़ेसर की नौकरी कर रहे हैं। सोवियत संघ के बिखरने के पहले , अमेरिका और रुस दोनो दुनिया के सभी मुल्कों के राजनितिक दलों के नेताओं को गुप्त रुप से पैसे देते थें , ्वह शीत - युद्ध का दौर था। आज रुस कि जगह चीन ने ले ली है , पैसा तो वह नही बाट सकता लेकिन एशिया के तकरीबन हर मुल्क में सता विरोधी सशस्त्र विद्रोह को मदद पहुचाने का काम करता है। अमेरिका की राजनिति में सी आई ए की अहम भुमिका है और दुनिया के सभी देशों में अपने हित की रक्षा के लिये राजनितिक दलों और नेताओं को सी आई ए के माध्यम से पैसे मिलते हैं, यह दिगर बात है की कोई भी दल या नेता ईसे नही स्वीकार करेगा ठिक उसी तरह जैसे कोई भी नेता यह नही स्वीकार करता कि चुनाव में उसने निर्धारित सीमा से अधिक खर्च किया । यह भारत है , जहां कि ३० प्रतिशत आबादी भ्रष्ट हो चुकी है और बाकी ५० प्रतिशत भ्रष्ट होने के कगार पर है। कांग्रेसियों को सुदर्शन के बयान पर बौखलाने के बजाय कामन वेल्थ , आदर्श सोसायटी , २ जी घोटाले के लिये अपने दल से जवाब मागना चाहिये था , बयान से बडा मुद्दा है भ्रष्टाचार ।वैसे कांग्रेस नैतिकता का पाठ न पढाये तो ज्यादा अच्छा है। मेनका गांधी को रात दस बजे सामान सहीत घर से बाहर निकाला गया था।


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